मंगलवार, 3 नवंबर 2009

समाचार और संवाददाता

समाचार क्या?

हिन्दी के शब्द समाचार का अर्थ सम्यक आचरण करना या व्यवहार बतलाना है।

हिन्दी भाषा के समाचार को अंग्रेजी में न्यूज कहा जाता है। अंग्रेजी का न्यूज शब्द न्यू का बहुवचन है, जो कि अंग्रेजी वर्णमाला के चार अक्षरों NEW और S से मिलकर बना है। ये चार अक्षर North, East, West और South क्रमश: उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण के द्योतक हैं तथा इन चारों दिशाओं में हो रही विविध घटनाओं की जानकारियों व सूचना का संकलन समाचार कहलाता है।

अंग्रेजी का न्यू शब्द लैटिन के नोवा और संस्कृत के नव शब्द का पर्याय है, जिसका अर्थ है नवीन या नूतन।

समाचार शब्द वृत्तांत, खबर, संवाद, विवरण, सूचना आदि नामों से भी जाना जाता है।

कई विद्वान, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों ने समाचार के सम्बंध में अपने-अपने विचार व मत प्रकट किये हैं, जिसके अनुसार – समाचार सामयिक असामान्य विचार, घटना या विवाद के ऐसे तथ्यपूर्ण, शुद्ध, निष्पक्ष व सरस विवरण होते हैं जो बहुसंख्यकों की अधिकतम अभिरुचियों को एक साथ प्रभावित करते हैं।

विलियम एम. माल्सबाई के अनुसार – किसी समय में होने वाली उन महत्वपूर्ण घटनाओं के सही और पक्षपातरहित विवरण को, जिसमें उस पत्र के पाठकों की अभिरुचि हो, समाचार कहते हैं। जार्ज एच. मौरिस के मतानुसार – समाचार जल्दी में लिखा गया इतिहास है। जे.जे.सिंडलर की राय में – पर्याप्त संख्या में मनुष्य जिसे जानना चाहे वह समाचार है। शर्त यह है कि सुरुचि तथा प्रतिष्ठा के नियमों का उल्लंघन न करें। एम. लाइस स्पेंसर के विचारानुसार – वह सत्य घटना या विचार जिसमें बहुसंख्य पाठकों की अभिरुचि है समाचार है। प्रो. विलियम ब्लेयर की राय में – अनेक व्यक्तियों की अभिरुचि जिस सामयिक बात में हो वह समाचार है। सर्वश्रेष्ठ समाचार वह है जिसमें बहुसंख्यकों की अधिकतम रुचि हो।

विलियम एल. रिवर्स के मतानुसार – समाचार घटना का वर्णन है। घटना स्वयं समाचार नहीं है। घटनाओं, तथ्यों और विचारों की सामयिक रिपोर्ट समाचार है, जिसमें पर्याप्त लोगों की रुचि हो। रा.रा. खांडेलकर के अनुसार – दुनिया में कहीं भी किसी समय कोई छोटी-मोटी घटना या परिवर्तन हो उसका शब्दों में जो वर्णन होगा उसे समाचार कहते हैं। टर्नर कालेज के विचारानुसार – वह सभी कुछ जिससे आप कल तक अनभिज्ञ थे, समाचार है। अंबिका प्रसाद वाजपेयी के अनुसार – हर घटना समाचार नहीं है, सिर्फ वही घटना समाचार बन सकती है जिसका कमोबेश सार्वजनिक हित हो, अस्पतालों में लोग भर्ती होते रहते हैं, अच्छे होते हैं और मरते भी हैं। लेकिन कोई मरीज इसलिये मर जाए कि अस्पताल में पहुंचने पर उसे देखने वाला कोई नहीं था, या डाक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउण्डर ने उसका गलत इलाज कर दिया, या नर्स ने एक मरीज की दवा दूसरे मरीज को दे दी, या आपरेशन करते समय कोई औजार पेट में रह गया और पेट सी दिया गया, ये सब समाचार हो सकते हैं। इसी तरह कोई नवीनतम आपरेशन हो, जैसे हृदय परिवर्तन, वह भी समाचार का विषय है। हेडन के कोश के अनुसार – सब दिशाओं की घटनाओं को समाचार कहते हैं। वूत्सले और कैंपवेल का मानना है कि – समाचार किसी वर्तमान विचार, घटना का विवाद का ऐसा विवरण है जो उपभोक्ताओं को आकर्षित करे। हार्पर लीच और जान सी. कैरोल के अनुसार – समाचार अति गतिशील साहित्य है। समाचार पत्र समय के करघे पर इतिहास के बहुरंगे बेलबूटेदार कपड़े को बुनने वाले तकुए है। मैंसफील्ड का कहना है कि घटना समाचार नहीं है, बल्कि वह घटना का विवरण है, जिसे उनके लिये लिखा जाता है जिन्होंने उसे देखा नहीं है। के. पी. नारायणन के अनुसार – समाचार किसी सामयिक घटना का, महत्वपूर्ण तथ्यों का परिशुद्ध तथा निष्पक्ष विवरण होता है, जिससे उस समाचार पत्र में पाठकों की रुचि होती है जो इस विवरण को प्रकाशित करता है।

पत्रकार नंदकिशोर त्रिखा का कहना है कि – समाचार को सदैव नया, दिलचस्प, मनोरंजक और महत्वपूर्ण होना चाहिए। जेराल्ड डब्ल्यू. जानसन की राय में – समाचार वह है जिसे प्रस्तुत करते समय कर्ता का कोई आर्थिक लाभ तो न होता है, परंतु जिसके संपादन से ही उसकी व्यावसायिक कुशलता का पूरा – पूरा पता चलता हो। श्रेष्ठ समाचार की परिभाषा यद्यपि यही है, तथापि साधारण व्यवहार में समाचार वे हैं जो अखबार में छपते हैं और अखबार वे हैं जिन्हें समाचार पत्र में काम करने वाले पत्रकार तैयार करते हैं। नार्थ क्लिफ के अनुसार – समाचार सामान्य से परे की कोई बात है। मेरी मान्यता है कि हम जिस समाज अथवा राज्य, राष्ट्र में रहते हैं, उसके प्रशासक, नेता या अगुआ जो कहतदे – करते हैं, वह भी समाचार है। हमको प्रभावित करने वाले आर्थिक, राजनीतिक, आपराधिक, कानूनी, भौगोलिक आदि सभी विषयों की हलचलें समाचार हैं।

दूसरे शब्दों में, देश-विदेश में सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक आदि क्षेत्रों में घटित किसी सामयिक, विशिष्ट नवीन व महत्वपूर्ण घटना की रिपोर्ट या उससे संबंधित तथ्यों की निष्पक्ष, प्रमाणिक जानकारी, बहुसंख्यकों की अधिकतम रुचि हो, समाचार है।

समाचार क्यों?

समाचार क्या है? जान लेने के बाद इस बात पर विचार करना बहुत जरूरी है कि आखिर समाचार क्यों? वास्तव में हर व्यक्ति के भीतर कुछ नया जानने की ललक होती है। यह ललक जो पता है उससे कहीं अधिक पता लगाने की चेष्टा को जन्म देती है। व्यक्ति की इसी ललक और चेष्टा की पूर्ति का सबसे प्रमुख साधन बनते हैं समाचार। सच यह है कि समाचार का सीधा सम्बंध हर जन के जानने की ललक की पूर्ति से जुड़ा हुआ है। कहा यह भी जा सकता है कि किसी जनतांत्रिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिये हर जन के जानने के अधिकारों को सार्थक ढंग से अमल में लाने का काम समाचार ही करता है।

दूसरी ओर यदि जनतंत्र को जनता द्वारा, जनता के लिये, जनता का शासन मानें तो जरूरी है कि जनता द्वारा चुनी हुई सत्ता, जनता के जीवन संदर्भों यानी आजीविका और मौलिक अधिकारों के लिये क्या-क्या निर्णय ले रही है? इन निर्णयों पर किस-किस तरह अमल किया जा रहा है? अगर नहीं किया जा रहा है तो क्यों? आदि जिज्ञासाओं से जुड़ी सूचनाओं की जानकारी सामान्य् जन को होनी चाहिए। कम शब्दों में कहा जाए तो आम आदमी के जानने के अधिकार या यूं कहें सूचना की स्वतंत्रता अब के दिनों में जनतंत्र की पहली शर्त बन गयी है।

यह एक बहुत बड़ा सच है कि जिस देश की जनता को सही और विश्वसनीय सूचनाएं नहीं मिल पातीं, उस देश की जनता में हमेशा असुरक्षा की भावना घर कर जाती है। वास्तव में ऐसे देश के लोगों को पूरी तरह आजाद भी नहीं माना जा सकता।

पत्रकारिता के संदर्भ में जानने के अधिकार की बात को उठाते समय लोग यह प्रश्न जरूर उठाते हैं कि आखिर जानने का अधिकार क्यों? क्या ये अधिकार शासन-प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार पर रोकथाम के लिये है? क्या ये अधिकार शासन-प्रशासन को देश के नागिरकों की जरूरतों, उनके अधिकारों व उनकी आजादी के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने के लिये है? क्या ये अधिकार जनतंत्र की मजबूती के लिये जरूरी है? ऐसे ही कई और भी प्रश्न।

सच भी यह है कि जानने का अधिकार किसी देश व समाज के लोगों के मौलिक अधिकारों के बढकर है। यह भी कहा जा सकता है कि मौलिक अधिकारों को बचाने के लिये जानने के अधिकारों का होना बहुत जरूरी है। आज जबकि दिख रहा है सब कुछ की तर्ज पर बाजार पनप रहा है व सामाजिक ताना – बाना संवारा जा रहा है, तब यह और भी जरूरी हो जाता है कि जानने का अधिकार और अधिक मजबूत हो। इस जरूरत को पूरा करने में यदि कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं तो वे समाचार पत्र और चैनल ही हैं।

समाचार की पहचान

मनुष्य के आचार-व्यवहार, पसंद-नापसंद, रुचि-अभिरुचि आदि समाज, वातावरण, स्थिति, परिस्थिति और जरूरत के हिसाब से बदलते रहते हैं। उसकी पसंद बहुत ही व्यापक और परिवर्तनशील होती है, फिर भी उसकी एक पसंद ऐसी है, जो अपरिवर्तनीय, शाश्वत और अटल है। और वह है अपने आस-पास, देश-विदेश में घट रही घटनाओं के बारे में जानने की उसकी तीव्र इच्छा। मनुष्य की इस इच्छा को पूरा करने के माध्यम आधुनिक से आधुनिकतम होते रहे हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि उसकी यह इच्छा कम से कमचर होने की बजाय तीव्र से तीव्रतर होती जी रही है। आजकल मनुष्य की इस इच्छा को पूरा करने का प्रयास समाचार पत्र पूरे जोर-शोर से कर रहे हैं। कई प्रकार के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक समाचार पत्र प्रकाशित हो रहे हैं जो राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक आदि कई विषयों को केन्द्र बिंदु बनाकर प्रकाशित होते हैं। इन सभी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों में बुनियादी तत्व मौजूद होते हैं, जो किसी भी समाचार को महत्व देने में विशेष योगदान देते हैं, जो पाठकों की सामान्य समाचार ग्राह्यता पर आधारित होते हैं और पाठकों की रुचि, आस्था, चेतना व स्वभाव को सीधे प्रभावित करते हैं तथा उसे बहुत गहरायी तक उद्वेलित कर कुछ करने के लिये प्रेरित करते हैं।

एक संवाददाता के लिये यह भी समझना बहुत जरूरी है कि समाचार पत्रों के पाठकों या समाचार चैनलों के दर्शक प्रत्येक दिन ऐसा कुछ पढना या देखना चाहते हैं, जो बीते हुए कल की अपेक्षा कुछ नया हो, उनकी रुचि के अनुरूप हो या वह सब कुछ बताने में समर्थ हो, जो उसके आस-पास के परिवेश में घट रहा है। संवाददाता जब तक अपने भीतर ऐसी क्षमता विकसित नहीं कर लेता कि समाचार की सही पहचान कर सके, तब तक वह अपने पाठकों या फिर दशर्कों के बीच अपनी पहचान नहीं बना सकता।

समाचारों की सबही पहचान यानी न्यूज जजमेंट के लिये जरूरी है कि उन तत्वों को अच्छी तरह से समझ लिया जाए, जो किसी घटना, स्थिति, बयान, निर्णय, आदेश, व्यक्ति या उपलब्धि आदि को समाचार बनाते हैं। ये तत्व निम्नलिखित हैं-

१. प्रभाव

२. बात का वजन

३. विवाद

४. विषमता

५. नूतनता

६. सत्यता और यथार्थता

७. निकटता या समीपता

८. आत्मीयता

९. उपयोगिता

१०. विचित्रता

११. वैयक्तिकता

१२. एकात्मता

१३. सुरुचिपूर्णता

१४. परिवर्तनशीलता

१५. रहस्यपूर्णता

१६. महत्वशीलता

१७. भिन्नता

१८. संक्षिप्तता

१९. स्पष्टवादिता

२०. आकार और संख्या

२१. समीक्षात्मकता

२२. प्रतिफल

१. प्रभाव

संवाददाता को हमेशा यह ध्यान में रखना होता है कि कौन – कौन से समाचार उसके पाठक समूह या आम आदमी के बहुत बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकते हैं या फिर उससे सीधे – सीधे जुड़े होते हैं। कओई बार एक ही समाचार में कई – कई बातें ऐसी होती हैं, जो आम आदमी को सीधे प्रभावित करती हैं या उनकी सीधा जुड़ाव होता है। ऐसी स्थितियों में यह देखना जरूरी हो जाता है कि कौन सी बात व्यापकता के साथ जनमानस के बहुत बड़े हिस्से को प्रभावित कर रही है। इसी बात को ऊपर रखकर समाचार की संरचना की जाती है।

उदाहरण के लिये नगर पालिका या नगर निगम की बैठक में सदस्यों द्वारा गृहकर बढाने और शहर में एक हर सुविधा से सुसज्जित अनाथालय बनाने का निर्णय लिया जाता है। मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखा जाए तो निश्चित ही अनाथालय बनाने का निर्णय महत्वपूर्ण लगता है और यह नगरवासियों के लिये एक नया समाचार भी हो सकती है, लेकिन गृहकर बढाने का निर्णय नगर के लगभग सभी निवासियों से जु़ड़ा है और उन्हें प्रभावित करने जा रहा है। इसलिये गृहकर बढने का समाचार प्रमुखता से देना होगा।

२. बात का वजन

समाचारों को प्रस्तुति देते समय यह देखना जरूरी हो जाता है कि किसी समाचार में कितना वजन है और वह उसकी तरह के अन्य समाचारों से किस तरह महत्वपूर्ण है। वजन की बात समझने के लिये संवाददाता को अपने विवेक का इस्तेमाल करना पड़ता है और यह विवेक उसके अनुभवों से प्रभावित होता है।

उदाहरण के लिये हत्याओं के समाचार में लूट के समाचार से अधिक वजन है और लूट के समाचार में छीना-झपटी के समाचार से अधिक वजन है। कई बार समाचारों का वजन इस आधार पर तय करना पड़ता है कि वह समाचार, जिस क्षेत्र में प्रकाशित या प्रसारित हो रहा है, उस क्षेत्र का सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक और आपराधिक ताना-बाना किस प्रकार का रहा है और रहेगा। स्थानीयता के आधार पर समाचारों को प्रस्तुत करके अपने समाचार पत्र या चैनल के लिये अधिक से अधिक पाठक व दर्शक तैयार किये जा सकते हैं।

३. विवाद

विवाद समाचारों का बहुत ही प्रिय शब्द रहा है। यदि किसी समाचार पत्र या चैनल पर प्रस्तुत होने वाले समाचारों पर ध्यान दें तो अधिकांश समाचार विवादों से उपजते दिखेंगे, विवाद लिये हुए होंगे या फिर विवाद को जन्म देते लगेंगे। आरोप – प्रत्यारोप, आंदोलन-समझौता, शिकायत-कार्यवाही, जांच-कार्रवाई, बैठक-बहिष्कार आदि सभी किसी न किसी विवाद से जुड़े होते हैं और समाचार को जन्म देते हैं। ऐसे समाचारों को प्रस्तुत करना इसलिये भी जरूरी रहता है कि इनसे समाज के कई वर्गों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ाव होता है।

४. विषमता

चार्ल्स डाना ने १८८२ में समाचार को परिभाषित करते हुए कहा था कि आदमी को कुत्ता काट ले तो यह सामान्य सी बात है, समाचार तो तब बनता है, जब आदमी कुत्ते को काट ले। कई मझे हुए पत्रकरों की धारणा रहती है कि जनता हैरान होने या चौंकने का पूरा आनन्द उठाती है। इसलिये कहीं कोई विषमता या फिर असामान्य दिखाई दे, तो उसे समाचार बनाने से नहीं चूकना चाहिए। संवाददाता अगर विषमताओं और असमान्य की खोज पर निकले तो उसे कुछ न कुछ मिल ही जाता है।

उदाहरण के लिये थानेदार के यहां चोरी का समाचार, जनता द्वारा शराबी पुलिस की जमकर धुनाई का समाचार, बहू द्वारा सास को जला डालने का समाचार, परीक्षा देते समय ही प्रसव पीड़ा उठने और बच्चा पैदा होने का समाचार, पुलिस संरक्षण में महिला से बलात्कार का समाचार आदि। वास्तव में समाज के हर पहलू से जुड़े तरह-तरह के विषयों में ऐसी विषमताएं मिल ही जाती हैं, जो समाचार का रूप ले सकती हैं। आवश्यकता है उन्हें परखने की क्षमता विकसित करने की।

५. नूतनता

पाठकों को असाधारण, नवीन, ताजा से ताजा समाचार आकर्षित करते हैं। समाचार प्रस्तुत करने में विलंब होने पर वे निस्तेज और निरर्थक हो जाते हैं। यही कारण है कि आकस्मिक रूप से घटित घटनाओं के समाचारों को समाचार पत्रों में अर्ध विकसित रूप में ही तुरंत ही दे दिया जाता है और बाद में समाचार संकलित कर उसे विकसित रूप में दिया जाता है।

६. सत्यता और यथार्थता

किसी घटना के यथार्थ, वास्तव्य और सत्य पर आधारित विश्लेषण, परीक्षण एवं पूर्वाग्रह या पक्षपातरहित परिशुद्ध एवं संतुलित विवरणों में स्पष्टता होती है, जो समाचार को मूल्यवान बनाती है और इन विवरणों पर दृढता, अटलता, दृढ प्रतिज्ञता और निश्चयात्मकता, जो समाज के हित में होती है, समाचार पत्र के हित अर्थात उसकी खपत बढाने में भी सहायक होती है।

७. निकटता या समीपता

पाठक के लिये निकटस्थ छोटी से छोटी घटना दूर बड़ी घटना से अधिक महत्वपूर्ण होती है। आत्मीय लगाव व अपनेपन के कारण वह अपनी निकटवर्ती या घनिष्ठ व्यक्ति, स्थान आदि से सम्बंधित घटना में अधिक रुचि लेता है, इसलिये जिस स्थान का समाचार दिया जा रहा हो और जिस स्थान पर समाचार पत्र प्रकाशित हो रहा हो उसमें भौगोलिक निकटता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

८. आत्मीयता

आत्मीयता अंतस्थ सहानुभूति को खोलती है और पाठकों को समाचारों से जोड़ती है। मानवीय गुणों जैसे – प्रेम, ईर्ष्या, दया, सहानुभूति, त्याग, भय, आतंक, घृणा, हर्ष से संबंधित समाचार आत्मीय होने के कारण पाठकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं।

९. उपयोगिता

जन-सामान्य के रहन – सहन, उनकी दिनचर्या, जीवनचर्या, लोक-व्यवहार, उद्योग व्यवसाय में आवश्यक, लाभदायक, सहयोगी व उपयोगी सभी सूचनाएं व जानकारियां समाचार पत्र की उपयोगिता को बढाती हैं, जो कि पाठकों को समाचार पत्र खरीदने के लिये बाध्य करती हैं।

१०. विचित्रता

मनुष्य की वृत्ति सदा ही जिज्ञासु रही है। संशय और रहस्य से पूर्ण समाचार पाठकों को आकर्षित करने के साथ उनकी जिज्ञासा को भी शांत करते हैं।

समाचार के साथ समाचार प्रस्तुत करने का अनोखापन, सुंदर ढंग पाठकों का मनोरंजन करने के साथ असाधारण सौंदर्यानुभूति व आनंदानुभूति कराते हैं।

११. वैयक्तिकता

आम और खास व्यक्ति के आधार पर समाचार भी विशेष और गौण महत्व रखते हैं। किसी विशेष व्यक्ति द्वारा किया गया साधारण काम और किसी सामान्य व्यक्ति द्वारा किया गया विशेष काम या अप्रत्याशित उपलब्धि समाचार बन जाती है। इन समाचारों में साधारण – विशेष, अमीर – गरीब, छोटे-बड़े सभी पाठक अपना बिम्ब देखते हैं, इसीलिये इसे समाचार तत्व प्राप्त होता है।

१२. एकात्मता

एकता, अखण्डता, समानता, अभिन्नता हमारे देश, समाज और समुदाय की आत्मा है। ये हमारे आदर्श व जीवनमूल्य हैं। ये हमारे मन में एकत्व का भाव जगाते हैं। इनका अनुभव भौगोलिक सीमा के बाहर भी होता है इसलिये समाचार पत्रों में देश, समाज व धर्म से जुड़े इन आधारों को भी महत्व दिया जाता है।

१३. सुरुचिपूर्णता

पाठकों की रुचि को प्रभावित करने वाले समाचार अधिक पठनीय होते हैं। प्रत्येक पाठक की समाचार में रुचि उसकी शिक्षा, सामाजिक वातावरण, समाज में स्थिति, उद्योग-व्यवसाय, उम्र आदि पर निर्भर करती है। फिर भी, आम चुनाव, प्राकृतिक आपदा, वैज्ञानिक अविष्कार, दंगे, खेल आदि से संबंधित समाचारों में सभी की रुचि होती है।

१४. परिवर्तनशीलता

मनुष्य परिवर्तनशील प्राणी है। उसकी इच्छा-अनिच्छा, पसंद-नापसंद, रुचि-अभिरुचि सदा परिवर्तित होती रहती है। इस कारण समाज या व्यक्ति के कार्य में भी परिवर्तन होता रहता है। यही कारण है कि सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक आदि परिवर्तनों के सामयिक समाचार पाठकों का ध्यान खींचते हैं।

१५. रहस्यपूर्णता

मानवजीवन रहस्यों के पूर्ण है। मानव स्वाभाव है कि उसके मन में हर पल, क्या, कहां, क्यों, कब, कैसे, किसने जैसे प्रश्न उठते रहते हैं। इन प्रश्नों के उत्तर के साथ गुप्त भेदों, गोपनीय विषयों के राज खुलते जाते हैं और पाठक को मानसिक संतुष्टि प्राप्त होती है।

१६. महत्वशीलता

यदि किसी घटना का परिणाम राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, व्यापारिक, साहित्यिक व सांस्कृतिक क्षेत्र में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने वाला हो तब भी वह समाचार पाठकों के लिये अधिक महत्वपूर्ण होता है।

१७. भिन्नता

बहुधा एक ही तरह के समाचार एकरूपता के कारण पाठक को आकर्षित नहीं कर पाते। भिन्न – भिन्न तरह के तथा अलग – अलग ढंग से प्रस्तुत समाचार पाठकों को अधिक आकर्षित और प्रभावित करते हैं।

१८. संक्षिप्तता

आज की जिंदगी भाग-दौड़ की और तेज जिंदगी है। आज हर व्यक्ति अपने में, अपनी जिंदगी में और अपने घर-परिवार में व्यस्त है। उसके पास बड़े – बड़े व लम्बे समाचारों को पढने के लिये अतिरिक्त या खाली समय नहीं है इसलिये उचित, आवश्यक व योग्य समाचारों के साथ ही सरल, सुंदर, सही, लचीली, धारदार, रोचक भाषा शैली में दिये गये समाचारों का अपना महत्व होता है, जो कि समाचार का एक मुख्य तत्व है।

१९. स्पष्टवादिता

तथ्यों व जानकारियों के साथ विचारों और प्रस्तुतिकरण में स्पष्टवादिता का भी विशेष महत्व होता है, क्योंकि स्पष्टवादिता ही पाठकों में समाचारों के प्रति विश्वास पैदा करती है।

२०. आकार और संख्या

आकार और संख्या के आधार पर भी किसी घटना का समाचार मूल्य आंका जाता है। विमान या रेल दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा-बाढ, अकाल, महामारी आदि तथा दंगे में अधिक संख्या में मृत और घायल यात्रियों, लोगों से सम्बद्ध समाचारों को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, जबकि कम लोगों या यात्रियों की मौत के समाचार समाचार की दृष्टि से अपेक्षतया गौण होते हैं।

२१. समीक्षात्मकता

समाचार समीक्षा करने योग्य या समीक्ष्य हों तो पाठकों को उसका ठीक-ठीक मूल्यांकन करने, दृढता से प्रमाणित करने तथा अपनी राय या सम्मति प्रकट करने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि समीक्षात्मकता समाचार का आवश्यक तत्व है।

२२. प्रतिफल

संवाददाता की यह जिम्मेदारी होती है कि वह पिछली घटनाओं, भुक्तभोगियों व विषय विशेषज्ञों की राय और अपने आकलन का सहारा लेकर अपने पाठकों व दर्शकों को किसी सूचना, स्थिति या घटना के प्रभाव, परिणाम या प्रतिफल के प्रति भी सचेत करता चले। सच्चाई यह है कि हर कोई यह जानना चाहता है कि अब क्या होगा? इससे क्या प्रभाव पड़ेगा? इससे बचा कैसे जाए? आदि – आदि। इसलिये लोगोंके साथ अपने समाचार पत्र या चैनल का सीधा सम्बंध बनाने के लिये यह जरूरी है कि संवाददाता सूचनाओं, स्थितियों व घटनाओं का विधिवत आकलन करे और विश्वसनीय तरीके से लोगों को आगे आने वाले समय के लिये जागरुक करे।

अंत में

समाचारों की पहचान में स्थानीयता का पुट होना बहुत जरूरी है। यह तय होना जरूरी है कि इस समाचार के पाठक या दर्शक किस परिवेश, किस भाषा, किस संस्कृति और किस रुचि के हैं। यदि इन चार जरूरी स्थानीय तत्वों को नजरअंदाज कर दिया गया तो यह निश्चित है कि समाचार और समाचार प्रस्तुत करने वाला संवाददाता अपने पाठकों और दर्शकों के बीच पैठ नहीं बना सकेगा। यह न केवल समाचार पत्र चैनल के लिये बल्कि समाचार एकत्र करने वाले संवाददाताओं के लिये घातक होता है। बहुत बार देखा जाता है कि जिस संवाददाता की पैठ अपने पाठकों और दर्शकों के बीच होती है, उसे समाचारों का टोटा कभी नहीं होता है। ऐसा इसलिये होता है कि उसके पाठक या दर्शक स्वयं में उसमें प्रचारक, प्रसारक व पोषक की तरह काम करने लगते हैं।

आन डिमांड सर्विस के इस समय में किसी संवाददाता के लिये यह जान लेना जरूरी होता है कि उसे जिस क्षेत्र में कार्य करना है, वहां के लोगों का परिवेश, संस्कृति, भाषा और रुचि किस तरह की है। इन चार स्थानीय तत्वों को जान लेने के बाद यह समझ लेना आसान हो जाता है कि जिस क्षेत्र में संवाददाता को काम करना है, वहां के लोगों की समाचारों से कैसी आशायें हैं यानी उनकी न्यूज डिमांड क्या है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. kamal h dost media ke prati aapki lagan dedication ko salam aap new media students ke liye jo kar rahw h wo kabile tarif h is web ko jyada rich kare all team membar ka mera salam

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छी जानकारी खासतौर से हिन्दी पत्रकारिता के छात्रों के लिए क्येांकि अंगरेजी वालों के लिए खूब किताबें हैं हिन्दी के लिए। ​अंगेरजी पीडितों की ओर से आपको साधुवाद। मुझे ऐसा कुछ नहीं मिला मसलन मुझे अंगरेजी सीखना पडी
    धर्मेन्द्र चौहान
    dharmendrabchouhan,blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं